बुलियन और कमोडिटी — सोना, चाँदी और उससे आगे
फिज़िकल सोना, गोल्ड ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, डिजिटल गोल्ड और चाँदी — कौन सा रूप कब समझदारी है, टैक्स कैसे लगता है, और पोर्टफोलियो में कितना रखें।
भारतीय परिवार दुनिया में सबसे ज़्यादा सोना रखते हैं — लेकिन ज़्यादातर सोना गहनों के रूप में है, जो निवेश का सबसे महँगा तरीक़ा है। सोना दीर्घकाल में शेयरों जितना रिटर्न नहीं देता; इसका काम अलग है — यह रुपये के कमज़ोर होने और संकट के दौर में पोर्टफोलियो का बीमा है। यह गाइड बताती है कि सोने-चाँदी को किस रूप में रखें, उस पर कितना खर्च और टैक्स लगता है, और कमोडिटी में कहाँ रुक जाना चाहिए।
सोना पोर्टफोलियो में क्यों — और क्यों नहीं
सोना कोई कमाई नहीं करता — न ब्याज, न लाभांश, न मुनाफ़ा। इसकी क़ीमत केवल इस बात से बढ़ती है कि लोग उसे कितना चाहते हैं। फिर भी यह काम का है, क्योंकि यह डॉलर के मुक़ाबले रुपये की कमज़ोरी और वैश्विक संकट के समय आम तौर पर ऊपर जाता है — ठीक तब, जब शेयर गिरते हैं।
- •मुद्रास्फीति और रुपये की गिरावट से बचाव — भारतीय क़ीमत = वैश्विक क़ीमत × USD/INR।
- •संकट-बीमा — 2008, 2020 और युद्ध जैसे झटकों में सोना चढ़ा जबकि इक्विटी टूटी।
- •कोई नकद प्रवाह नहीं — इसलिए यह लक्ष्य पूरा करने का इंजन नहीं, शॉक-अब्ज़ॉर्बर है।
व्यावहारिक आवंटन
कुल निवेश पोर्टफोलियो का 5–10% सोने में पर्याप्त है (चाँदी सहित 10–12% तक)। घर के गहने इसमें न गिनें — वे उपभोग हैं, निवेश नहीं।
सोना रखने के पाँच तरीक़े — तुलना
| रूप | लागत | शुद्धता/सुरक्षा | तरलता | अतिरिक्त कमाई |
|---|---|---|---|---|
| गहने | मेकिंग चार्ज 8–25% + 3% GST | हॉलमार्क (HUID) ज़रूरी | बेचने पर कटौती | नहीं |
| सिक्के/बार | 2–8% प्रीमियम + 3% GST | अच्छी, बिल रखें | ज्वेलर/बैंक पर निर्भर | नहीं |
| गोल्ड ETF | 0.4–0.8%/वर्ष + ब्रोकरेज | डीमैट में, चोरी का डर नहीं | बहुत ऊँची (एक्सचेंज) | नहीं |
| गोल्ड म्यूचुअल फंड (FoF) | 0.5–1.0%/वर्ष | डीमैट की ज़रूरत नहीं, SIP संभव | 1–2 दिन | नहीं |
| सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) | शून्य लागत | भारत सरकार समर्थित | 8 वर्ष लॉक (5वें वर्ष से निकासी) | 2.5%/वर्ष ब्याज |
डिजिटल गोल्ड को लेकर सावधानी
ऐप्स पर मिलने वाला 'डिजिटल गोल्ड' SEBI या RBI द्वारा नियंत्रित नहीं है — यह विक्रेता कंपनी के भरोसे पर टिका है, और खरीद-बिक्री का स्प्रेड 3–6% तक होता है। छोटी राशि के शौक़ के लिए ठीक, गंभीर आवंटन के लिए ETF या SGB चुनें।
नई SGB किश्तें 2025 के बाद नियमित रूप से जारी नहीं हो रही हैं; पुरानी सीरीज़ एक्सचेंज पर खरीदी जा सकती हैं, पर वहाँ तरलता कम और भाव कभी-कभी छूट/प्रीमियम पर होता है। इसलिए आज सबसे सरल विकल्प गोल्ड ETF या गोल्ड FoF है।
गहनों की असली लागत — एक उदाहरण
मान लीजिए 22 कैरेट सोने का भाव ₹6,000/ग्राम है और आप 20 ग्राम का हार ख़रीदते हैं, जिस पर 12% मेकिंग चार्ज लगता है।
| मद | राशि |
|---|---|
| सोने की क़ीमत (20 ग्राम) | ₹1,20,000 |
| मेकिंग चार्ज @12% | ₹14,400 |
| GST @3% | ₹4,032 |
| कुल भुगतान | ₹1,38,432 |
| तुरंत बेचने पर मिलने वाला मूल्य (मेकिंग/GST वापस नहीं) | ≈ ₹1,15,000 |
पहले ही दिन ~17% मूल्य ग़ायब — इसीलिए गहने निवेश नहीं हैं।
चाँदी — ज़्यादा उतार-चढ़ाव, औद्योगिक माँग
चाँदी आधी कीमती धातु है और आधी औद्योगिक धातु — सोलर पैनल, EV और इलेक्ट्रॉनिक्स में इसका बड़ा उपयोग है। इसलिए यह सोने से ज़्यादा तेज़ चढ़ती है और ज़्यादा तेज़ गिरती भी है।
- •सिल्वर ETF (2022 से भारत में उपलब्ध) फिज़िकल चाँदी रखने से बेहतर — भंडारण का झंझट नहीं।
- •फिज़िकल चाँदी भारी और कम शुद्धता-प्रमाणित होती है; बेचने पर कटौती ज़्यादा।
- •उतार-चढ़ाव सोने से लगभग 1.5 गुना — कुल पोर्टफोलियो का 2–3% से ऊपर न जाएँ।
अन्य कमोडिटी — कच्चा तेल, धातु, कृषि
MCX पर कच्चा तेल, ताँबा, ज़िंक, प्राकृतिक गैस और कृषि उत्पादों के वायदा सौदे होते हैं। ये लीवरेज (मार्जिन) पर चलते हैं और एक्सपायरी वाले अनुबंध होते हैं — यानी दिशा सही होने पर भी समय ग़लत हो जाए तो नुक़सान।
यह निवेश नहीं, ट्रेडिंग है
कमोडिटी वायदा दीर्घकालिक संपत्ति-निर्माण के औज़ार नहीं हैं। किसान या कारोबारी हेजिंग के लिए इसका उपयोग करते हैं। आम निवेशक के लिए सोना/चाँदी ETF तक रुक जाना ही उचित है।
टैक्स नियम (FY 2025-26)
| रूप | होल्डिंग | टैक्स |
|---|---|---|
| फिज़िकल सोना/चाँदी | 24 माह से अधिक | 12.5% LTCG (इंडेक्सेशन नहीं) |
| फिज़िकल सोना/चाँदी | 24 माह तक | स्लैब दर |
| गोल्ड/सिल्वर ETF | 12 माह से अधिक | 12.5% LTCG |
| गोल्ड/सिल्वर ETF | 12 माह तक | स्लैब दर |
| SGB — परिपक्वता पर | 8 वर्ष | पूँजीगत लाभ पूर्णतः कर-मुक्त |
| SGB — 2.5% ब्याज | — | स्लैब दर पर कर योग्य |
₹2 लाख से अधिक नकद में सोना ख़रीदना धारा 269ST के तहत मना है, और ₹2 लाख से ऊपर की ख़रीद पर PAN देना पड़ता है।
जिन आम ग़लतियों से बचें
गहनों को निवेश मानना
मेकिंग चार्ज और GST मिलाकर 12–28% पहले ही दिन चला जाता है, और बेचते समय ज्वेलर फिर कटौती करता है। निवेश के लिए ETF या SGB लें, गहने केवल पहनने के लिए।
बिल और हॉलमार्क न रखना
बिना HUID हॉलमार्क और बिल के बेचते समय शुद्धता पर विवाद होता है और लागत-प्रमाण न होने से टैक्स गणना में भी दिक़्क़त आती है।
तेज़ी देखकर 25–30% सोना कर देना
सोना दो-तीन साल चढ़ता है, फिर वर्षों सपाट रहता है। रैली के शिखर पर आवंटन बढ़ाना सबसे आम भूल है — 5–10% पर टिके रहें और साल में एक बार रीबैलेंस करें।
अनियंत्रित डिजिटल गोल्ड में बड़ी रकम
SEBI/RBI की निगरानी नहीं, और 3–6% का स्प्रेड। बड़ी राशि के लिए एक्सचेंज-लिस्टेड ETF सुरक्षित और सस्ता है।
आपकी कार्य-सूची
- तय करें: सोना कुल पोर्टफोलियो का 5–10% (चाँदी 2–3% तक)।
- निवेश के लिए गोल्ड ETF या गोल्ड FoF चुनें; SIP से हर महीने थोड़ा-थोड़ा।
- पुरानी SGB सीरीज़ एक्सचेंज पर देखें — छूट पर मिले तो कर-मुक्त परिपक्वता का लाभ लें।
- फिज़िकल ख़रीदें तो HUID हॉलमार्क, बिल और मेकिंग चार्ज लिखित में लें।
- बड़ी नकद ख़रीद से बचें; ₹2 लाख से ऊपर PAN दें।
- साल में एक बार आवंटन जाँचें और लक्ष्य पर वापस लाएँ।